मनुष्य के शब्द और व्यवहार बताते हैं कि मनुष्य के भीतर कितनी मलिनता और कितनी शुद्धता भरी हुई है। श्री राम असली सनातनी के प्रतीक हैं। उन्होंने कभी भी दूर शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया चाहे वह रावण के लिए ही क्यों न हो। उनका हर शब्द धर्मसंगत और करुणा से भरा हुआ होता था। श्री राम आपके भीतर भी हैं। अपने अंतरात्मा को जगाइए और अपने शब्दों को और कार्यों को मलिन मत होने दीजिए। असली सनातनी शांत और स्वच्छ मन का होता है। बाहर की मलिनता अपने भीतर मत प्रवेश करने दीजिए। सच्चे सनातनी बनिए। जय श्री राम।
श्री राम के आदर्शों का पालन करना ही सच्ची राम भक्ति है। उनके मार्गदर्शन से अपने जीवन को सफल बनाएं। विकास की ओर कदम बढ़ाने के लिए हमें फ़ॉलो करें। 🔥
Comments
Post a Comment