Every living being is born with the independence to live life on their own terms. Just as Lord Shri Ram stood for justice and righteousness, we too must uphold the freedom of every individual. No one has the right to strip away someone else's dignity or autonomy.
मनुष्य के शब्द और व्यवहार बताते हैं कि मनुष्य के भीतर कितनी मलिनता और कितनी शुद्धता भरी हुई है। श्री राम असली सनातनी के प्रतीक हैं। उन्होंने कभी भी दूर शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया चाहे वह रावण के लिए ही क्यों न हो। उनका हर शब्द धर्मसंगत और करुणा से भरा हुआ होता था। श्री राम आपके भीतर भी हैं। अपने अंतरात्मा को जगाइए और अपने शब्दों को और कार्यों को मलिन मत होने दीजिए। असली सनातनी शांत और स्वच्छ मन का होता है। बाहर की मलिनता अपने भीतर मत प्रवेश करने दीजिए। सच्चे सनातनी बनिए। जय श्री राम।
Comments
Post a Comment